किसानों के बहाने बंजर भूमि पर खेती करने की कोशिश में हैं विपक्षः नकवी

किसानों के भारत बंद का व्यापक असर

विपक्षी राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं बंद का समर्थन

विपक्ष की एकजुटता पर नकवी ने खड़ा किया सवाल

 

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है। किसानों के इस आह्वान का कमोवेश सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया है वहीं भाजपा के कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने देश के विपक्ष पर निशाना साधा है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि किसानों के बहाने विपक्ष बंजर भूमि में अपनी खेती करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें वह सफल होने वाला नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दल से कुछ गिने-चुने किसानों को गुमराह कर राजनीतिक रोटियां सेंकना चाह रहे हैं। ऐसे विपक्षी राजनीतिक दल किसानों के कंधों पर रखकर बंदूक चलाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि देश के बड़ी संख्या में किसान केंद्र सरकार की नीतियों के साथ में हैं और वह इन राजनीतिक दलों के बहकावे में नहीं आ रहे। जो किसान नेता तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कर रहे हैं वह शुरुआत से कहते आ रहे हैं कि एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म हो जाएगी। मंडिया बंद हो जाएगी और उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया जाएगा, लेकिन हकीकत इससे उलट है। मोदी सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी बढ़ाया है, नई मंडीयां खोली जा रही हैं और किसानों की जमीन जबरन छीनने जैसी कहीं कोई बात तक नहीं है।

बता दें कि तन कृषि कानूनों की वापसी को लेकर किसान संगठन पिछले लंबे अर्से से दिल्ली से सटी सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग यही है कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें। हालांकि केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच पिछले साल दिसंबर और इस साल के जनवरी महीने के दौरान एक दर्जन बार बातचीत भी हुई और बैठकें भी हुई लेकिन बात नहीं बनी। उसके बाद से ही फिलहाल सरकार और किसान संगठनों के बीच किसी भी तरह का संवाद नहीं हुआ है और गतिरोध जारी है।

 

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