अब एयर इंडिया का ‘महाराजा’ हुआ टाटा ग्रुप का, सर्वाधिक बोली लगाई

 

टाटा संस को उठाना होगा 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ

नई दिल्ली। लंबे अर्से से आर्थिक संकट से जूझ रही एयर इंडिया को आखिरकार खरीदार ही मिल गया। टाटा संस ने एयर इंडिया की बोली जीत ली है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अनुसार एयर इंडिया की बिक्री के लिए लगाई गई दोनों बोलियों में से सरकार ने टाटा ग्रुप को चुना है। टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने एअर इंडिया को खरीदने के लिए आखिरी बोली लगाई थी।

इसके साथ ही एयर इंडिया की घर वापसी हो गई है। एअर इंडिया को 1932 में टाटा ग्रुप ने ही शुरू किया था। टाटा समूह के जे.आर.डी. टाटा इसके फाउंडर थे। तब एअर इंडिया का नाम टाटा एअर सर्विस रखा गया था। 1938 तक कंपनी ने अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर दी थीं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया।आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49% हिस्सेदारी खरीदी थी। साल 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद से एअर इंडिया कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही। एअर इंडिया में मार्च 2021 में खत्म तिमाही में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका जताई गई। कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज था लेकिन अब टाटा संस को इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ उठाना होगा। मौजूदा समय में एअर इंडिया देश में 4400 और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है।

 

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